Kayamat ki kitni nishaniya hai ?? | Q & A Session | Islamic Knowledge

 Kayamat ki kitni nishaniya hai ?? | Q & A Session | Islamic Knowledge


क़यामत की निशानियाँ, 

या क़यामत के संकेत, इस्लामी धर्मशास्त्र में महत्वपूर्ण विषय हैं। क़ुरान और हदीस दोनों में इन संकेतों का उल्लेख है, जो दुनिया के अंत और न्याय के दिन की ओर इशारा करते हैं। ये संकेत दो श्रेणियों में विभाजित हैं: छोटी निशानियाँ और बड़ी निशानियाँ।

छोटी निशानियाँ:

 * पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का भेजा जाना।

 * ज्ञान का गायब होना और अज्ञानता का फैलना।

 * शराब का सेवन और व्यभिचार का बढ़ना।

 * समय का तेज़ी से गुज़रना।

 * विश्वासघात और झूठ का फैलना।

 * इमारतों का बढ़ना और लोगों का एक-दूसरे से मुकाबला करना।

 * औरतों का मर्दों की तरह और मर्दों का औरतों की तरह पहनावा पहनना।

 * अमानत में खयानत।

 * ब्याज (सूद) का फैलना।

बड़ी निशानियाँ:

 * दज्जाल का प्रकट होना।

 * ईसा (अलैहिस्सलाम) का स्वर्ग से उतरना।

 * याजूज और माजूज का निकलना।

 * सूरज का पश्चिम से निकलना।

 * दुआतुल-अर्ज (धरती से निकलने वाला जानवर) का निकलना।

 * धुएं (दुखान) का फैलना।

 * तीन बड़े भूस्खलन: एक पूर्व में, एक पश्चिम में और एक अरब प्रायद्वीप में।

 * एक आग का यमन से निकलना जो लोगों को इकट्ठा होने की जगह की ओर ले जाएगी।

क़ुरान संदर्भ:

 * क़ुरान में, क़यामत के बारे में कई आयतें हैं, जैसे कि सूरह अल-क़ियामा (75), सूरह अल-ज़लज़ला (99), और सूरह अल-क़ारिया (101)। इन सूरहों में क़यामत के दिन की भयानक घटनाओं और उस दिन होने वाले न्याय का वर्णन किया गया है।

 * क़ुरान में है: "क़यामत का समय निकट आ गया और चंद्रमा फट गया।" (सूरह अल-क़मर: 54)

 * क़ुरान में है: "वे तुमसे उस घड़ी के बारे में पूछते हैं कि वह कब आएगी? कह दो: इसका ज्ञान तो मेरे रब के पास ही है, वही उसे उसके समय पर प्रकट करेगा। आकाश और धरती में वह भारी (घटना) होगी, वह तुम पर अचानक ही आएगी।" (सूरह अल-आराफ़: 187)

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि केवल अल्लाह ही जानता है कि क़यामत कब आएगी। ये निशानियाँ हमें उस दिन के लिए तैयार रहने और अच्छे कर्म करने की याद दिलाती हैं।


Yahan qayamath ki kuch nishaniyon ka zikr hai, Quran ke hawale se:

Choti Nishaniyan:

 * Ilm ka uth jana aur jahalat ka phailna: Knowledge ka kam hona aur ignorance ka badhna.

 * Sharāb ka peena aur zinā ka phailna: Alcohol consumption aur adultery ka badhna.

 * Waqt ka tezi se guzar jana: Time ka jaldi jaldi beetna.

 * Amanat mein khayanat: Trust ko todna.

 * Sud (interest) ka phailna: Interest based transactions ka badhna.

 * Aurton ka mardon ki tarah aur mardon ka aurton ki tarah libas pehanna: Cross dressing.

 * Imaraton ka badhna aur logon ka ek dusre se muqabla karna: Buildings ka badhna aur competition.

Badi Nishaniyan:

 * Dajjal ka zahoor: The appearance of the Antichrist.

 * Isa (Alaihis Salam) ka nazool: The descent of Jesus (peace be upon him).

 * Yajuj aur Majuj ka nikalna: The emergence of Gog and Magog.

 * Suraj ka maghrib se nikalna: The sun rising from the west.

 * Dabbatul-arz ka nikalna: The beast of the earth emerging.

 * Dukhan (Dhuwa) ka phailna: The smoke spreading.

 * Teen bade bhukamp (landslides): Teen bade landslides, ek mashriq mein, ek maghrib mein, aur ek jazirat-ul-arab mein.

 * Yaman se ek aag ka nikalna jo logon ko jama hone ki jagah ki taraf le jayegi: A fire from Yemen that will drive people to their gathering place.

Quran Reference:

 * "Qiyamath ka waqt qareeb aa gaya aur chand phat gaya." (Surah Al-Qamar: 54)

 * "Woh tumse us ghadi ke baare mein poochte hain ke woh kab aayegi? Keh do: iska ilm to mere Rabb ke paas hi hai, wohi use uske waqt par zaahir karega. Aasman aur zameen mein woh bhaari (hadsa) hogi, woh tum par achanak hi aayegi." (Surah Al-A'raf: 187)

Allah hi sabse behtar jaanta hai ke qayamath kab aayegi. Yeh nishaniyan sirf hamen us din ke liye tayyar rehne aur nek amal karne ki yaad dilati hain.


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